|
Total Page Views of Dil Se Desi Shayari-Poetry Blog by
Visitors w.e.f. 20.00 Hrs IST 26/06/11
Visitors w.e.f. 20.00 Hrs IST 26/06/11
Total Page/Topic Views
Recent Topics
Showing posts with label Hindi Sad Poems. Show all posts
Showing posts with label Hindi Sad Poems. Show all posts
Thursday, 26 July 2012
यम तू जानता है ये धरती है भारत की ----राजीव चतुर्वेदी
Tuesday, 8 May 2012
सफ़र लंबा है,...मुझे जाना है...चल रहा हूँ मैं ..." --राजीव चतुर्वेदी
" ऐ उड़ते हुए फरिश्तो,--- मेरी फेहरिस्त देख लो
हैं नाम इसमें दर्ज वही लोग हैं यहाँ
जिनका ज़मीर जिंदा है जज़्वात हैं वहां
अभी ऐतबार बाकी है मुझे कुछ और दिन रहना है
अभी प्यार बाकी है कुछ लोगों को उसे देना है
वो मोहब्बत, वो इमारत, वो इबारत डूबती है आँख में मेरी
मैं और रहना चाहता था, जिन्दगी से प्यार मेरे यार मुझको भी था
मैं जाता हूँ ,...सफ़र है यह, ...गुजरता हूँ गुजारिश से
मैं नहीं रहूँगा फिर भी कर सको तो मेरी वफाओं पे ऐतबार कर लेना
ऐ उड़ते हुए फरिश्तो मेरी फेहरिस्त देख लो
सफ़र लंबा है,...मुझे जाना है ,...चल रहा हूँ मैं ..." -----राजीव चतुर्वेदी
Thursday, 19 April 2012
आओ ख्वाब को तोड़ें उन्हें फिर बेच दें. " ----- राजीव चतुर्वेदी
"आओ ख्वाब को तोड़ें उन्हें फिर बेच दें,
बाजार की रस्में रहम का वहम भी मत रख.
दिल कल तोड़ा था यहाँ वह बिक गया
ईमान के टुकड़े यहाँ परवान चढ़ते हैं
भूगोल को तोड़ो तो फिर देश बनते हैं
देश को तोड़ो प्रदेश बनते हैं
प्रान्त को तोड़ो बनोगे मुख्यमंत्री
भ्रान्ति को तोड़ो के तो फिर क्रान्ति होगी
चरित्र के टुकड़े की कीमत कौन देता है ?
हर कोइ मौक़ा मिले तो बेच देता है
सत्य के टुकड़े बिक़े अखबार में देखो
न्याय के टुकड़े जजों की सत्य निष्ठा है
समाज के टुकड़े बनी सब जातियां बिकती हैं जोरों से
दहेज़ को सहेजते लोगों से पूछो --देह बिकती है विवाहों में यहाँ
आत्मा बिकती है हर त्यौहार में
चरित्र के टुकड़े की कीमत कौन देता है ?
हर कोइ मौक़ा मिले तो बेच देता है
ईमान के टुकड़े यहाँ परवान चढ़ते हैं
बाजार की रस्में रहम का वहम भी मत रख
आओ ख्वाब को तोड़ें उन्हें फिर बेच दें. " ----- राजीव चतुर्वेदी
Tuesday, 17 April 2012
अब तो दीपक बुझ रहा है जल चुके विश्वास का." ----राजीव चतुर्वेदी
"बड़ी उदास है यह रात, सर्द हैं रिश्ते,
हवाएं हांफती है, खिड़कियाँ भी खौफ में हैं,
सर्द होते जा रहे रिश्तों के रास्ते लम्बे हैं यहाँ,
सत्य का साहस लिए, संताप से सहमा हुआ गुजरता हूँ गुजारिश सा
घटनाएं भी गुजरती हैं घटाओं की तरह जैसे अनुभव हो मरुथर में भी बारिस का,
यादों के अलावों में सुलगती थी जो याद तेरी अब बुझती जा रही है, --ताप लूं .
कल सुबह हर याद को फिर राख बानना है
दौर ऐसा है दिया दयनीय है हर याद का
सो भी जाने दो मुझे, दरवाजों पर अब दस्तक न दो
आस आंसू से बही थी, ओस पंखुड़ियों पे न देख
अब तो दीपक बुझ रहा है जल चुके विश्वास का." ----राजीव चतुर्वेदी
|
Saturday, 7 April 2012
आओ फरिश्तों से कुछ बात करें बहुत उदास है ये रात----राजीव चतुर्वेदी
"आओ फरिश्तों से कुछ बात करें
बहुत उदास है ये रात
कोहरे के लिहाफ ओढ़ कर शायद तुम हो जो झांकती हो मुंडेरों से अभी
चाँद की बिंदी लगा लो अपने माथे पर
समझलो तुम सुहागिन हो
Friday, 6 April 2012
वह जो रिश्ते सूख कर थे गिर गए ----राजीव चतुर्वेदी
"वह जो रिश्ते सूख कर थे गिर गए,
पेड़ के पीले से पत्तों की तरह
झाड़ कर दालान से बाहर भी तुमने कर दिया
अब क्या कोपल उगेंगी फिर नए विश्वास की ?
वक्त की आंधी से जो अब गिर रहे हैं सूखे पत्ते से
वह रिश्ते हमारे
सुना है मिट्टी में मिल कर खाद बन जाते यहाँ हैं
इस खाद में फिर ख्वाब का पौधा उगेगा
पत्तीयाँ उसमें भी होंगी
सभ्यता के इस सफ़र में सहमते लोगो सुनो तुम
वह जो रिश्ते सूख कर थे गिर गए,
पेड़ के पीले से पत्तों की तरह
झाड़ कर दालान से बाहर भी तुमने कर दिया
अब क्या कोपल उगेंगी फिर नए विश्वास की ?" ----राजीव चतुर्वेदी
पेड़ के पीले से पत्तों की तरह
झाड़ कर दालान से बाहर भी तुमने कर दिया
अब क्या कोपल उगेंगी फिर नए विश्वास की ?
वक्त की आंधी से जो अब गिर रहे हैं सूखे पत्ते से
वह रिश्ते हमारे
सुना है मिट्टी में मिल कर खाद बन जाते यहाँ हैं
इस खाद में फिर ख्वाब का पौधा उगेगा
पत्तीयाँ उसमें भी होंगी
सभ्यता के इस सफ़र में सहमते लोगो सुनो तुम
वह जो रिश्ते सूख कर थे गिर गए,
पेड़ के पीले से पत्तों की तरह
झाड़ कर दालान से बाहर भी तुमने कर दिया
अब क्या कोपल उगेंगी फिर नए विश्वास की ?" ----राजीव चतुर्वेदी
Sunday, 18 March 2012
Apna Sab Kuch Tumhe Bna Bethe
apna sab khuch tmhei bna bethe
meri har sans me ruh me tum ho
tumhe ham to khuda bna bethe
kis qadar mera dil ye piyasa hai
apna ganga tumhe bna bethe
rab se manga he tum ko mene sanam
sari dunia ko ham gavan bethe
kitna piyara hai ye mera sapna
tumko palkon me ham saja bethe
tum milo ya na milo ham ko
apni dharkan tumhe bna bethe
rab mere maf karde meri khta
insan ko khuda bna bethe
main qun piyar itna karti hun
aise pardesi pe jan nisar kar bethe
meri har sans me ruh me tum ho
tumhe ham to khuda bna bethe
kis qadar mera dil ye piyasa hai
apna ganga tumhe bna bethe
rab se manga he tum ko mene sanam
sari dunia ko ham gavan bethe
kitna piyara hai ye mera sapna
tumko palkon me ham saja bethe
tum milo ya na milo ham ko
apni dharkan tumhe bna bethe
rab mere maf karde meri khta
insan ko khuda bna bethe
main qun piyar itna karti hun
aise pardesi pe jan nisar kar bethe
Kyon Na Raas Aayi Kabhi Rasme Wafa Ham Ko
qun na ras ayi kabhi rasme wafa ham ko
dil tujhe deke bhi gham mile ham ko
kyon tujhe piya fir bhi itna karte hei
jab ki na chen mila pal -do- pal ham ko
log to piyar me haste hei kabhi rote hei
ek ham he jo sadan piyar me roye ham to
gham tune hijr ke etne diye sehna sake
yad me tadhfe sadan gham me jiye ham to
kyon teri chah me ummid me ham zinda hei
jabki malum he tu lot ke na ayega hamko
bibbo kis aas pe ummid pe zinda he abhi
wo khuwab he khuwab pure hote he kabhi
dil tujhe deke bhi gham mile ham ko
kyon tujhe piya fir bhi itna karte hei
jab ki na chen mila pal -do- pal ham ko
log to piyar me haste hei kabhi rote hei
ek ham he jo sadan piyar me roye ham to
gham tune hijr ke etne diye sehna sake
yad me tadhfe sadan gham me jiye ham to
kyon teri chah me ummid me ham zinda hei
jabki malum he tu lot ke na ayega hamko
bibbo kis aas pe ummid pe zinda he abhi
wo khuwab he khuwab pure hote he kabhi
Sunday, 11 March 2012
Tujhe is Qadar Main Chahoon, ki Apne Aap ko Bhool Jaun...
Kabhi Lafz bhool jaun,
Kabhi baat bhool jaun....
Tujhe is qadar main chahoon,
ki apne aap ko bhool jaun...
Rooth kar bhi kabhi jo tujh se,
Kaheen door jana chahoon..
Jate huye main khud ko,
Tere paas bhool jaun....
Main Ab Ye Baat Kehta Hun
Main ab yeh baat keheta hu, Bahot tum yaad aati ho...
Tumhe jo bhoolna chahun, ye rishta todna chahun...
Na jane kyun mere dil me, tum hee har waqt rehti ho...
Ke jab tum yaad aati ho, Ye aankhein bheeg jati hain...
Aur lub bhi tham jate hai, Tum ko yaad nahi karta main...
Magar dil sab samajhta hai, jo karta hai tumse mohabbat...
Teri masum si baatein, tera wo pyara sa lehja...
Main kaise bhool jaun sab, Bhaut mushkil hai ye karna...
Tumhe jo pyar hai mujh se, Wo saccha pyaar hai jaana...
Mera jo pyar hai tum se, wo mehz dillagi nahi hai...
Mujhe maloom hai jaana, tum bhi mujh ko chahti ho...
Magar ek sach to ye bhi hai, hamara rishta bhi ajeeb hai...
Bus ek jo pyar paya hai, usi ko kho nahi sakta main..
Magar kambhakt ye dil hai, tumhi ko yaad karta hai...
Main ye baat kehta hun, ke behad pyaar tumse hai....
Mila Woh Bhi Nahi Karte, Mila Hum Bhi Nhi Krte !
Mila wo bhi nhi krte !
mila hum bhi nhi krte !
waafa wo bhi nhi krte !
khata hum bhi nhi krte !
Unhein ruswai ka dukh hai !
hmein tanhai ka dukh hai !
gila wo bhi nhi krte !
gila hum bhi nhi krte !
Saturday, 25 February 2012
समय के सूचकांक पर मूल्य अपना भी अंको. " --- राजीव चतुर्वेदी
"जिन्दगी की राह में जो प्यार के पौधे थे रोपे,
सुना है अब बड़े वह हो गए हैं
फूल कुछ हैं, तितलियाँ कुछ, छाँव सी यादें
और सूखी पत्तीयाँ भी प्यार की
सूर्य जब हो सामने परछाईयाँ पीछे ही दिखती हैं
देख लो जज़बात की इस धूप में साए सी मेरी याद को परछाईयाँ कहते हैं लोग
रात जब होती है तो परछाईयाँ दिखती नहीं,--जिन्दगी की रात अब आने को है
समझ लो शाम से सत्य अब संकेत देता है
कदों से जो बड़ी थी, कदम पर जो चली थी अब बिछ्ड़ती हैं
सूर्य जब ढलता है तो फिर साथ देता ही है कौन ?
समय के सूचकांक पर मूल्य अपना भी अंको. " --- राजीव चतुर्वेदी
Friday, 24 February 2012
मोहब्बत है एक ख्वाब या एक जुनून है?
मोहब्बत है एक ख्वाब या एक जुनून है?
किसी को मोहब्बत अगर है तो क्यूँ है..
मोहब्बत में तो सिर्फ़ बेताबियाँ है..
तो फिर क्यूँ मोहब्बत में..
दिल को सुकून है... सुकून है..
कोई ये बता दे की, क्या है मोहब्बत? मोहब्बत..
Tuesday, 24 January 2012
Rona Bhi Jo Chahen to Wo Rone Nahi Deta
Rona Bhi Jo Chahen to Wo Rone Nahi Deta
Sunday, 22 January 2012
Saturday, 21 January 2012
रास्ते में ही छोड़कर, उन्हे जाने कि आदत है
रास्ते में ही छोड़कर उन्हे जाने कि आदत है
वो मेरे हर झूठ से खुश होती,
जिसे हमेशा सच बोलने की आदत थी,
वो एक आंसू भी गिरने पर खफा होती थी,
जिसे तन्हाई में रोने की आदत थी,
Wednesday, 18 January 2012
चलो वादा रहा भूल जाना हमें!
आपकी पलकों पर रह जाये कोई!
आपकी सांसो पर नाम लिख जाये कोई!
चलो वादा रहा भूल जाना हमें!
अगर हमसे अच्छा दोस्त मिल जाये कोई!
मोहब्बत नहीं है कोई किताबों की बाते!
समझोगे जब रो कर कुछ काटोगे रातें!
जो चोरी हो गया तो पता चला दिल था हमारा!
करते थे हम भी कभी किताबों की बाते!
Tuesday, 17 January 2012
और रास्ते में बिछ चुकी यह अंधेरी रात है."---- राजीव चतुर्वेदी
"आओ अहसास की अंगीठी सुलगाएं, सर्द हैं रिश्ते
और रास्ते में बिछ चुकी यह अंधेरी रात है,
जिन्दगी के गुजरे पहर में याद का दरवाजा खटखटाता है कौन ?
वहम और रहम के भरोसे प्यार के रिश्ते पराये हैं जो सारे
सुना है बहुएं ससुर को शहर में जीने का सलीका बतलाने लगी हैं
और चौखट काँप जाती है दरवाजों की हलचल से
आओ अहसास की अंगीठी सुलगाएं,
सर्द हैं रिश्ते
और रास्ते में बिछ चुकी यह अंधेरी रात है." ---- राजीव चतुर्वेदी
|
Tuesday, 3 January 2012
बहते अश्को की ज़ुबान नही होती
बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,
लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,
मिले जो प्यार तो कदर करना,
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.
अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।
Subscribe to:
Posts (Atom)